नई दिल्ली । सीवर जाम, सीवर ओवरफ्लो और सीवर ब्लॉकेज की समस्या से परेशान दिल्लीवालों को इससे निजात दिलाने के लिए जल बोर्ड ने नया सीवर मास्टर प्लान तैयार करने का प्लान बनाया है। सीवर मास्टर प्लान तैयार करने के लिए उन कंपनियों को आमंत्रित किया गया है, जो जल बोर्ड के मौजूदा 10,720 किमी लंबे इंटरनल (पेरिफेरल) सीवर नेटवर्क की स्टडी कर सके। सीवर नेटवर्क की स्टडी करने वाली एजेंसी को स्टडी करने के साथ-साथ मौजूदा नेटवर्क में कमियां और उसे दुरुस्त करने के तरीकों का सुझाव भी देना होगा। मौजूदा सीवर मास्टर प्लान-2031 साल 2000 में बनाया गया था। जल बोर्ड अफसरों ने सीवर नेटवर्क स्टडी के लिए जो रिपोर्ट तैयार की है, उसके अनुसार दिल्ली के रिहायशी, कमर्शल, इंडस्ट्रियल व बाकी इलाकों में सीवर नेटवर्क की लंबाई 10,720 किमी है। 200 किमी लंबा ट्रंक सीवर नेटवर्क है। जल बोर्ड रोजाना औसतन 990 एमजीडी पानी सप्लाई करता है, जिसमें से 80 प्रतिशत (792 एमजीडी) सीवेज वेस्ट के रूप में जनरेट होता है, जो 65 सीवेज पंपिंग स्टेशन में जाता है और यहां से 38 सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है। वॉटर को ट्रीट कर बड़े नालों में छोड़ा जाता है। सीवर नेटवर्क को तैयार करने के लिए जल बोर्ड ने सीवर मास्टर प्लान-2031 की स्टडी रिपोर्ट पर 300 एमएम डायमीटर की लाइनें बिछाई थी, लेकिन रिहायशी इलाकों में फ्लोर एरिया रैश्यो (एफएआर) में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में आबादी तेजी से बढ़ी। जिसके चलते 2031 से पहले ही मौजूदा सीवर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आवश्यकता से अधिक भार बढ़ गया और बड़ी आबादी सीवर जाम समेत कई समस्या से परेशान हैं।
जल बोर्ड ने नया सीवर मास्टर प्लान तैयार करने का प्लान बनाया

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