आकाश में एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिली जब ‘ब्लू मून’ ने अपनी चमक से दुनिया भर के स्काईवॉचर्स और खगोल विज्ञान प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। यह विशेष घटना 31 मई 2026 को हुई, जब एक ही कैलेंडर महीने में दूसरी पूर्णिमा दिखाई दी। खगोल विज्ञान में इसी घटना को ‘ब्लू मून’ कहा जाता है।
हालांकि नाम में ‘ब्लू’ शब्द शामिल है, लेकिन इस दौरान चंद्रमा का रंग वास्तव में नीला नहीं दिखाई देता। यह केवल एक कैलेंडर आधारित खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब किसी एक महीने में दो बार पूर्णिमा पड़ती है। चूंकि यह घटना बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए इसे दुर्लभ माना जाता है।
इस बार का ब्लू मून और भी खास रहा क्योंकि यह एक ‘माइक्रोमून’ भी था। इसका मतलब है कि पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर था, जिसके कारण उसका आकार सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई दिया।
भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोगों ने इस दुर्लभ नजारे का आनंद लिया। सोशल मीडिया पर भी ब्लू मून की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए। खगोलविदों के अनुसार, इस तरह की घटनाएं लोगों में अंतरिक्ष और विज्ञान के प्रति उत्सुकता बढ़ाने का काम करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगला कैलेंडर ब्लू मून देखने के लिए लोगों को कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में 2026 का यह दुर्लभ खगोलीय नजारा लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहेगा।


