गांधी जयंती 2026: सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर देश को नई दिशा देने वाले महात्मा गांधी की कहानी

Daily Prime Desk
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2 अक्टूबर का दिन भारत के इतिहास में बेहद खास है। इसी दिन 1869 में गुजरात के पोरबंदर में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था। आगे चलकर वे महात्मा गांधी के नाम से प्रसिद्ध हुए और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। वर्ष 2026 में उनकी 157वीं जयंती मनाई जाएगी।

गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को अपने संघर्ष का आधार बनाया। कानून की पढ़ाई के लिए वे लंदन गए और बाद में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। वहां भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव का सामना करने के बाद उन्होंने अन्याय के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध की अपनी विचारधारा को विकसित किया।

1915 में भारत लौटने के बाद गांधीजी धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा आंदोलन और अहमदाबाद मिल हड़ताल जैसे शुरुआती आंदोलनों ने उन्हें आम लोगों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

1930 का दांडी मार्च गांधीजी के आंदोलनों में एक ऐतिहासिक पड़ाव रहा। उन्होंने नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक मार्च किया। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ सविनय अवज्ञा का बड़ा प्रतीक बना।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गांधीजी के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को नई गति मिली। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके विचारों और अहिंसक संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गांधीजी की हत्या कर दी गई। आज भी 2 अक्टूबर को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। संयुक्त राष्ट्र ने भी 2007 में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया था।

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