निवेश में ये 8 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, लॉन्ग टर्म फंड बनाने से पहले जान लें जरूरी बातें

Daily Prime Desk
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निवेश के जरिए भविष्य के लिए बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो केवल पैसा लगाना ही काफी नहीं है। इसके लिए सही रणनीति, नियमित बचत और जोखिम को समझना भी जरूरी है। कई बार लोग बिना योजना के निवेश शुरू कर देते हैं या बाजार में उतार-चढ़ाव देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। ऐसी गलतियां लंबे समय में उनके वित्तीय लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के निवेशक शिक्षा पोर्टल के अनुसार, निवेश से पहले वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और अलग-अलग विकल्पों में निवेश का बंटवारा समझना चाहिए। निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती और पिछला प्रदर्शन भविष्य के परिणाम की गारंटी नहीं है।

निवेश की 8 आम गलतियां, जिनसे बचना जरूरी है

1. बिना रिसर्च के निवेश करना: किसी कंपनी के शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य योजना में पैसा लगाने से पहले उसके बारे में जानकारी जुटाना जरूरी है। केवल किसी की सलाह या सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर निवेश करने से जोखिम बढ़ सकता है।

2. दोस्तों और रिश्तेदारों की देखा-देखी निवेश करना: किसी परिचित को मुनाफा होने का मतलब यह नहीं कि वही विकल्प हर व्यक्ति के लिए सही होगा। निवेश का फैसला अपनी आय, जरूरत, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।

3. निवेश शुरू करने में देरी करना: कई लोग अधिक कमाई होने या बड़ी रकम जमा होने का इंतजार करते रहते हैं। इससे निवेश की अवधि कम हो सकती है। अपनी क्षमता के अनुसार छोटी रकम से नियमित शुरुआत करने पर विचार किया जा सकता है।

4. जल्दी अमीर बनने की चाह में अधिक जोखिम लेना: कम समय में बहुत ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश में निवेशक जोखिम भरे विकल्प चुन सकते हैं। असाधारण या गारंटीड रिटर्न के दावों की जांच किए बिना पैसा नहीं लगाना चाहिए।

5. जोखिम क्षमता को समझे बिना निवेश करना: हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अलग होती है। जिस निवेश में उतार-चढ़ाव अधिक हो, वह ऐसे व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता जिसे जल्द ही उस पैसे की जरूरत पड़ने वाली है।

6. वित्तीय लक्ष्य और रणनीति के बिना पैसा लगाना: निवेश शुरू करने से पहले यह तय करना चाहिए कि पैसा घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या किसी अन्य उद्देश्य के लिए जमा किया जा रहा है। लक्ष्य के अनुसार निवेश की अवधि और विकल्प तय किए जा सकते हैं।

7. पूरा पैसा एक ही विकल्प में लगाना: किसी एक कंपनी, शेयर या निवेश विकल्प पर निर्भर रहने से उस निवेश का खराब प्रदर्शन पूरे पोर्टफोलियो को प्रभावित कर सकता है। अलग-अलग निवेश विकल्पों में उचित बंटवारा जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

8. बाजार देखकर भावनात्मक फैसले लेना: बाजार में तेजी आने पर जल्दबाजी में निवेश बढ़ाना या गिरावट के दौरान घबराकर निवेश बेच देना नुकसानदेह हो सकता है। निवेश की समीक्षा जरूरी है, लेकिन हर उतार-चढ़ाव पर रणनीति बदलना जरूरी नहीं है।

लंबे समय में निवेश की योजना को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित बचत, पर्याप्त आपातकालीन फंड और पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा भी जरूरी है। निवेशकों को अपनी जरूरतों और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

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