देहरादून, 26 फरवरी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री जिला सहकारी बैंक देहरादून के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर केएस राणा ने आज राजपुर रोड़ स्थित उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता मे भाजपा सरकार पर सहकारी समितियों के चुनावों में धांधली का अरोप लगाते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर सहकारी समितियों के चुनाव प्रारम्भ हुए, लेकिन सरकार ने समितियों के पुराने सदस्यों को चुनाव में भाग ना लेने के आदेश जारी करते हुए मताधिकार से वंचित कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस पर कुछ सहकारी बंधुओें ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी, जिस पर उच्च नयायालय ने सरकार को निर्देशित किया कि चुनाव पुरानी पद्वति के आधार पर ही कराये जाये। किन्तु भाजपा सरकारा द्वारा उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना कर नई पद्वति से ही चुनाव कराने की घोषण कर दी। जिसके अनुसार 2021 से पूर्व बने हुए सदस्यों को विगत तीन वर्षो मे समिति से लेन देन ना होने की स्थिति में मताधिकार से वंचित किया गया तथा 2021 के बाद बने सदस्यों को लेनदेन की बाधिता से मुक्त रखा गया। इस प्रकार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा 11 फरवरी 2025 को कर दी गई और तद्नुसार 24 एवं 25 फरवरी को चुनाव में मतदान तिथि घोषित की गई। 24 फरवरी को समिति के संचालक मण्डल चुनाव सम्पन्न हो गये तथा 25 फरवरी को समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा अन्य समितियों को भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों का निर्वाचन किया जाना था, परन्तु 24 फरवरी की रात्रि 10 बजे यह सूचना प्राप्त हुई कि 25 फरवरी को होने वाले चुनाव स्थगित कर दिये गये हैं। सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण से इसका कारण जानने का प्रयास किया गया परन्तु विभाग द्वारा कोई कारण नही बताया गया, जबकि चुनाव को स्थगित करने का कोई आदेश उच्च न्यायालय का नही था। साथ ही सहकारी समिति अधिनियम के नियम 17 में स्पष्ट उल्लेख है कि चुनाव प्रारम्भ होने के बाद किसी भी दशा में चुनाव स्थगित नही किये जा सकते। परन्तु भाजपा सरकार की हठधर्मिता और निरंकुशता के चलते सहकारी समिति अधिनियम एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों को धता बताकर मनमाने तरीके से चुनाव स्थगित कर दिये गये। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी भाजपा सरकार के अधिकारियों द्वारा 24 फरवरी के मतदान के समय को भी बिना किसी पूर्व सूचना के बदलकर प्रातः 9 बजे के बजाय 11 बजे से प्रारम्भ किया गया। जबकि पूर्व में निर्धारित निर्वाचन कार्यक्रम में उद्घोषणा के बाद किसी प्रकार का परिवर्तन नही किया जा सकता। डॉ. राणा ने कहा कि सहकारी समिति अधिनियम की धारा 34 के अनुसार राज्य सरकार अपने प्रतिनिधि के रूप में प्रत्येक समिति में 2 व्यक्तिों को नाम निर्दिष्ट कर सकती है। जिसमें से 1 प्रतिनिधि सरकारी सेवक होगा जिसे मतदान का अधिकार नही होगा। परन्तु भाजपा सरकार ने ना तो अधिनियम की परवाह की और ना ही उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन किया। यह सरकार समिति में अपना बहुमत बनाने के लिए धारा 34 का उलंघन करके मनमाने तरीके से अधिक संख्या में व्यक्तियों के नाम जोडने का काम करती है। इस अवसर पर प्रदेेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री बिरेन्द्र पोखरियाल, राष्ट्रीय निदेशक सहाकरी संघ मानवेन्द्र सिंह, मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, प्रवक्ता सुजाता पॉल,गिरिराज हिन्दवान , डॉ. प्रतिभा सिंह आदि उपस्थित थे।
भाजपा सरकारा ने की उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना

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