भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में इसके उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने “कोर्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग संबंधी विनियम, 2026” का मसौदा जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि AI का इस्तेमाल अंतिम न्यायिक निर्णय देने, सजा तय करने या जमानत पात्रता का आकलन करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
मसौदा नियमों के अनुसार AI केवल एक सहायक तकनीक के रूप में कार्य करेगा। इसका उपयोग कानूनी शोध, दस्तावेजों के अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन, केस मैनेजमेंट और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास रहेगा।
न्यायपालिका का मानना है कि AI तकनीक कई कार्यों को तेज और अधिक कुशल बना सकती है, लेकिन यह मानव विवेक, संवेदनशीलता और न्यायिक समझ का विकल्प नहीं बन सकती। इसी कारण न्यायालय ने न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता को सुरक्षित रखने के लिए AI की भूमिका को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मसौदे पर कानूनी विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं और आम जनता से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। माना जा रहा है कि यह पहल भारत की न्यायिक व्यवस्था में तकनीक और मानव निर्णय के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


