नौकरी से रिटायर होने के बाद नियमित वेतन बंद हो जाता है, लेकिन रोजमर्रा के खर्च, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें और महंगाई का असर जारी रहता है। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद लंबे समय तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने रहने के लिए केवल बड़ी बचत होना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि रिटायरमेंट फंड का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए और जरूरत के अनुसार पैसे निकालने की योजना बनाई जाए।
वित्तीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए पर्याप्त रिटायरमेंट कॉर्पस, नियंत्रित निकासी दर, सही एसेट एलोकेशन और तीन-बकेट स्ट्रेटजी को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही लंबी उम्र और अचानक आने वाले मेडिकल खर्चों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त लिक्विड फंड रखना भी जरूरी है।
क्या है तीन-बकेट स्ट्रेटजी?
तीन-बकेट स्ट्रेटजी में रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक जरूरतों को अलग-अलग समयावधि के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजमर्रा के खर्चों के लिए जरूरी पैसा उपलब्ध रहे और लंबी अवधि के निवेश को बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान तुरंत बेचने की मजबूरी न हो।
पहले बकेट में निकट भविष्य के खर्चों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध धन रखा जा सकता है। दूसरे बकेट का इस्तेमाल आने वाले वर्षों की जरूरतों के लिए किया जा सकता है। तीसरे बकेट में लंबी अवधि के लिए ऐसे निवेश रखे जा सकते हैं, जिनमें जोखिम और संभावित रिटर्न को व्यक्ति की आर्थिक स्थिति के अनुसार संतुलित किया जाए।
बकेट में कितनी रकम रखनी चाहिए, यह रिटायरमेंट के बाद होने वाले मासिक खर्च, पेंशन, अन्य आय, उम्र और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
निकासी दर पर नियंत्रण क्यों जरूरी?
रिटायरमेंट के बाद यदि जरूरत से ज्यादा पैसा निकाला जाता है, तो बचत उम्मीद से पहले समाप्त हो सकती है। इसलिए सालाना निकासी को कुल निवेश और उपलब्ध आय के हिसाब से तय करना चाहिए। एक ही निकासी दर सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं होती। निवेश पर मिलने वाला रिटर्न, महंगाई, बाजार की स्थिति और रिटायरमेंट की अवधि को ध्यान में रखना आवश्यक है।
महंगाई और मेडिकल खर्चों की तैयारी भी जरूरी
रिटायरमेंट के शुरुआती वर्षों में जो खर्च पर्याप्त लगते हैं, वे महंगाई के कारण भविष्य में बढ़ सकते हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती होने, इलाज या अन्य आपात स्थितियों में बड़ी रकम की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए रिटायरमेंट प्लान में आपातकालीन फंड, स्वास्थ्य बीमा और आसानी से निकाली जा सकने वाली रकम को जगह देना जरूरी है। सही योजना के साथ रिटायरमेंट कॉर्पस का इस्तेमाल अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है और भविष्य की वित्तीय अनिश्चितताओं का सामना करने में मदद मिल सकती है।


