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चारधाम कपाट बंद होने के बाद भी नहीं थमेगा श्रद्धा का सिलसिला, शीतकालीन यात्रा से फिर रफ्तार पकड़ेगा उत्तराखंड पर्यटन

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का समापन भले ही नजदीक आ रहा हो, लेकिन राज्य का पर्यटन पहिया रुकने वाला नहीं है। चारों धामों – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री – के कपाट बंद होने के बाद अब प्रदेश सरकार शीतकालीन यात्रा (Winter Yatra) को नई ऊर्जा देने की तैयारियों में जुट गई है।

हर साल कपाट बंद होने के बाद देवस्थलों की पूजा उनके प्रवास स्थलों पर संपन्न होती है। केदारनाथ धाम की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में, बद्रीनाथ धाम की पूजा ज्योतिर्मठ (नृसिंह मंदिर) और पांडुकेश्वर के योगबदरी में की जाती है। वहीं गंगोत्री धाम की गंगा माता की पूजा मुखबा में और यमुनोत्री धाम की यमुना माता की पूजा खरसाली में होती है।

पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि इन प्रवास स्थलों को शीतकाल में भी आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाए, ताकि श्रद्धालु व पर्यटक देवदर्शन के साथ बर्फीली वादियों का आनंद भी ले सकें। पिछले वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान 70 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार सरकार उम्मीद कर रही है कि यह संख्या एक लाख का आंकड़ा पार करेगी।

सरकार का मानना है कि अगर शीतकालीन यात्रा को नियमित रूप से प्रमोट किया गया तो चारधाम क्षेत्र के स्थानीय लोगों को सालभर रोजगार मिलेगा और पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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