उत्तराखंड में वन भूमि अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को बताया ‘मूकदर्शक’, जांच समिति के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतने गंभीर मामले में अधिकारी केवल ‘मूकदर्शक’ बने रहे, जो बेहद चिंताजनक है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जों की जानकारी लंबे समय से सामने आ रही थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ, बल्कि वन संरक्षण से जुड़े कानूनों की भी खुली अवहेलना हुई।
कोर्ट ने इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति में राज्य के मुख्य सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCF) को शामिल किया गया है, जो वन भूमि पर हुए अतिक्रमण, निर्माण गतिविधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि पर चल रहे सभी निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है और खाली पड़ी वन भूमि को तुरंत वन विभाग के नियंत्रण में लेने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को होगी।




