
नई दिल्ली: अगर किसी व्यक्ति का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया जाए, तो क्या उसकी भारतीय नागरिकता भी समाप्त मानी जाएगी? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो तो आयोग को मामला केंद्र सरकार के पास भेजना होगा, जहां नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों के तहत अंतिम फैसला लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि SIR से प्रभावित लोगों की करीब 34 लाख अपीलें अब भी लंबित हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि मतदाता सूची से नाम हटने के बाद कुछ लोगों को राशन, अन्नपूर्णा योजना और अन्य सरकारी लाभों से वंचित किया जा रहा है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि नागरिकता संबंधी अंतिम निर्णय केंद्र सरकार ही करेगी, चुनाव आयोग नहीं।

