भारत की संसदीय व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 815 से 850 तक करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य न केवल बढ़ती आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व बढ़ाना है, बल्कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी मजबूत करना है।
सरकार के इस प्रस्ताव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रावधान शामिल है, जिसके तहत लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। यह कदम नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में वृद्धि से संसद में विभिन्न राज्यों और वर्गों का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। हालांकि, इस प्रस्ताव के लागू होने से पहले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया भी जरूरी होगी, जो राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे सकती है।


