कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी.के. शिवकुमार ने 3 जून 2026 की शाम राज्य के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली। इस सत्ता परिवर्तन के साथ ही राज्य में नेतृत्व का नया दौर शुरू हो गया है। लंबे समय से कांग्रेस संगठन और सरकार के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह फैसला सामने आया, जिसने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है।
डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य नियुक्त किया गया है। कांग्रेस कार्यसमिति पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था मानी जाती है और इसमें शामिल होना किसी भी नेता के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सिद्धारमैया अब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की रणनीति और नीतिगत निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बेंगलुरु में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। समारोह के दौरान समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद डी.के. शिवकुमार ने कहा कि उनकी सरकार विकास, सुशासन और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव कांग्रेस की रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन स्थापित करना चाहती है। शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।
कर्नाटक में हुए इस नेतृत्व परिवर्तन को केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस की नई रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।


