भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने युवा पीढ़ी को अपनी सेहत और फिटनेस को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग कामकाज और दूसरी व्यस्तताओं के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों में कमी और फास्ट फूड का बढ़ता चलन भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकता है। धोनी ने युवाओं से अपील की कि वे रोजाना अपनी फिटनेस के लिए समय निकालें और खेलों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
जावेद अख्तर के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान धोनी ने कहा कि लोगों को अपनी सेहत को भविष्य के लिए निवेश की तरह देखना चाहिए। उनका मानना है कि फिट रहने के लिए किसी स्वास्थ्य समस्या के सामने आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि कम उम्र से ही ऐसी आदतें विकसित करनी चाहिए जो आगे चलकर भी काम आएं।
बदलती जीवनशैली पर जताई चिंता
धोनी ने आधुनिक जीवनशैली में आ रहे बदलावों की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि पहले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में चलना-फिरना और शारीरिक मेहनत स्वाभाविक रूप से शामिल थी। अब कई लोग घर से ऑफिस जाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, दिनभर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और फिर वाहन से ही घर लौट आते हैं। इस वजह से शरीर को पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं मिल पाती।
उन्होंने खानपान की आदतों में आए बदलावों पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, भारत में पारंपरिक खानपान की आदतें ऐसे समय में विकसित हुई थीं, जब लोग रोजमर्रा के कामों में अधिक शारीरिक मेहनत करते थे। अब खानपान की कई पुरानी आदतें बनी हुई हैं, लेकिन शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं।
धोनी ने फास्ट फूड, अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों और तली-भुनी चीजों के सेवन को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। खासकर कम सक्रिय रहने वाले लोगों के लिए खानपान और व्यायाम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
बच्चों को बचपन से खेलों से जोड़ने की अपील
पूर्व भारतीय कप्तान ने माता-पिता से बच्चों को छोटी उम्र से ही अलग-अलग खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर बच्चा पेशेवर खिलाड़ी नहीं बनेगा, लेकिन खेलों से जुड़ने पर उसमें सक्रिय रहने की आदत विकसित हो सकती है।
धोनी के मुताबिक, खेल केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं हैं। इनके जरिए बच्चे जीत और हार को स्वीकार करना, असफलताओं से सीखना और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उनमें सुधार करना भी सीखते हैं। कम उम्र में खेलों से जुड़ने का लाभ आगे चलकर भी मिल सकता है।
’24 घंटे में से एक घंटा खुद के लिए निकालें’
धोनी ने युवाओं को अपनी सेहत के लिए रोजाना समय निकालने का संदेश देते हुए कहा कि 24 घंटे में से एक घंटा खुद के लिए समर्पित करना चाहिए। इसके लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम जाए या किसी कठिन व्यायाम को अपनाए। अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार खेलना, नियमित व्यायाम करना और दिनभर सक्रिय रहना भी मददगार हो सकता है।
उन्होंने यह भी संदेश दिया कि सेहत का ध्यान रखना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। अच्छी सेहत का लाभ परिवार और आसपास के लोगों को भी मिलता है। इसलिए जो लोग अपनी खातिर फिटनेस के लिए समय नहीं निकाल पाते, उन्हें अपने प्रियजनों के लिए ही सही, अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
जावेद अख्तर ने युवा पीढ़ी की तारीफ की
कार्यक्रम में मौजूद लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने भी नई पीढ़ी को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में कई सकारात्मक गुण दिखाई देते हैं और पुरानी पीढ़ी को यह नहीं मानना चाहिए कि हर बात का जवाब केवल उसी के पास है। उनके अनुसार, बुजुर्गों को भी युवाओं से सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।
धोनी और अख्तर की बातचीत में जहां नई पीढ़ी के विचारों और मूल्यों पर चर्चा हुई, वहीं युवाओं की शारीरिक सेहत और बदलती जीवनशैली का मुद्दा भी सामने आया। धोनी का संदेश साफ है कि फिटनेस को किसी खास उम्र या पेशे तक सीमित न रखकर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।


