हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार तब्बू आज 4 नवंबर को अपना 55वां जन्मदिन मना रही हैं। करीब चार दशक से फिल्मों में सक्रिय तब्बू ने अपने अभिनय से ऐसी पहचान बनाई है, जो किसी एक दौर या किरदार तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कभी रोमांटिक फिल्मों में अपनी अदाओं से दर्शकों का ध्यान खींचा तो कभी गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं से अभिनय की नई मिसाल पेश की। उनकी खासियत रही है कि उन्होंने हमेशा अलग-अलग तरह के किरदारों को चुनने का साहस दिखाया।
देव आनंद की फिल्म से शुरू हुआ सफर
तब्बू का असली नाम तबस्सुम फातिमा हाशमी है। उन्होंने बहुत कम उम्र में फिल्मों की दुनिया में कदम रखा था। साल 1985 में देव आनंद की फिल्म ‘हम नौजवान’ में वह बाल कलाकार के रूप में नजर आईं। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान दिया और कुछ समय तक फिल्मों से दूरी बनाए रखी।
साल 1991 में तेलुगु फिल्म ‘कुली नंबर 1’ से उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद 1994 में ‘पहला पहला प्यार’ और ‘विजयपथ’ जैसी फिल्मों में काम किया। अजय देवगन के साथ आई ‘विजयपथ’ ने उन्हें हिंदी सिनेमा में खास पहचान दिलाई। फिल्म के साथ-साथ इसके गाने भी काफी लोकप्रिय हुए।
‘माचिस’ से साबित की अभिनय की ताकत
तब्बू के करियर में साल 1996 बेहद अहम रहा। गुलजार की फिल्म ‘माचिस’ में उन्होंने एक संवेदनशील और गंभीर किरदार निभाया। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
इसके बाद ‘विरासत’, ‘हु तू तू’, ‘अस्तित्व’ और ‘चांदनी बार’ जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए, जिनमें महिलाओं की जिंदगी, संघर्ष, रिश्ते और सामाजिक परिस्थितियों के अलग-अलग पहलू सामने आए। साल 2001 में आई ‘चांदनी बार’ में बार डांसर मुमताज की भूमिका ने उनके अभिनय की गहराई को एक बार फिर साबित किया। इस फिल्म के लिए उन्हें दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
रोमांस से कॉमेडी और थ्रिलर तक
तब्बू ने गंभीर फिल्मों के साथ-साथ व्यावसायिक सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखी। ‘हेरा फेरी’ में उनकी कॉमिक टाइमिंग देखने को मिली, जबकि ‘चीनी कम’ में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया। विशाल भारद्वाज की ‘मकबूल’ और ‘हैदर’ में भी उन्होंने प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं।
बाद के वर्षों में ‘अंधाधुन’, ‘भूल भुलैया 2’, ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी और ‘क्रू’ जैसी फिल्मों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को नए दर्शकों तक पहुंचाया। ‘अंधाधुन’ में रहस्यमयी और नकारात्मक रंगों वाला किरदार हो या ‘भूल भुलैया 2’ में मंजुलिका की भूमिका, तब्बू ने हर बार अपनी अलग छाप छोड़ी।
अजय देवगन के साथ खास ऑनस्क्रीन तालमेल
तब्बू और अजय देवगन की जोड़ी हिंदी सिनेमा में लंबे समय से दर्शकों की पसंद बनी हुई है। ‘विजयपथ’ से शुरू हुआ यह साथ आगे ‘दृश्यम’, ‘गोलमाल अगेन’, ‘दे दे प्यार दे’ और ‘भोला’ जैसी फिल्मों में भी नजर आया। दोनों कलाकारों की स्क्रीन पर सहज केमिस्ट्री और एक-दूसरे के साथ काम करने का तालमेल दर्शकों को पसंद आता रहा है।
55 साल की उम्र में भी तब्बू अपने अभिनय के दम पर दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। उनका फिल्मी सफर इस बात की मिसाल है कि एक कलाकार समय के साथ खुद को बदलते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रख सकता है।


