कोल्हापुर का वह शाम कभी नहीं भूला जा सकता—10 वर्षीय श्रवण जहाँ खेल रहा था, अचानक बेचैनी महसूस की, दौड़कर घर आया, और माँ की गोद में लेटते ही उसकी सांसें थम गईं ।
मूर्ति जाती है उस माँ की, जब उसने देखा कि उसका बच्चा अपनी गोद में अंतिम सांसें ले रहा है। परिवार पहले ही अपनी बेटी को खो चुका था। अब इस मासूम बेटे की मृत्यु ने उनका दुःख दुगना कर दिया है । यह दर्दनाक दृश्य दर्शाता है कि जिंदगी कितनी नाज़ुक हो सकती है।


