क्या लिम्फैटिक वॉकिंग से कम होती है सूजन और ब्लोटिंग? जानें इस वायरल फिटनेस ट्रेंड की सच्चाई

Daily Prime Desk
4 Min Read

सोशल मीडिया पर इन दिनों फिटनेस से जुड़ा एक नया ट्रेंड चर्चा में है, जिसे ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ कहा जा रहा है। इसमें सामान्य तरीके से चलने के साथ शरीर का पोश्चर सीधा रखने, गहरी सांस लेने और हाथों को स्वाभाविक रूप से स्विंग करने पर जोर दिया जाता है। दावा किया जा रहा है कि इससे शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लूइड कम हो सकता है, सूजन और ब्लोटिंग में राहत मिल सकती है और वजन घटाने में भी मदद मिल सकती है। लेकिन क्या इन दावों के पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण हैं?

क्या होती है लिम्फैटिक वॉकिंग?

लिम्फैटिक वॉकिंग में किसी विशेष उपकरण या जटिल एक्सरसाइज की जरूरत नहीं होती। इसमें सामान्य वॉकिंग को कुछ बातों के साथ किया जाता है। जैसे चलते समय पीठ सीधी रखना, सांस को नियंत्रित करना, हाथों को स्वाभाविक रूप से आगे-पीछे चलाना और लगातार एक आरामदायक गति बनाए रखना।

इस ट्रेंड का नाम शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम से जुड़ा है। यह सिस्टम लिम्फ नामक तरल को शरीर के ऊतकों से वापस रक्त प्रवाह तक पहुंचाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को सहयोग देने और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाता है। मांसपेशियों की गतिविधि और शारीरिक मूवमेंट लिम्फ के प्रवाह में मदद करते हैं।

क्या इससे सूजन और ब्लोटिंग कम होती है?

चलने-फिरने से लंबे समय तक बैठे रहने के कारण होने वाली कुछ असहजता और अस्थायी सूजन में मदद मिल सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि लिम्फ फ्लूइड के प्रवाह को बनाए रखने में भी सहायक है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुई खास ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ तकनीक से सूजन या ब्लोटिंग सामान्य वॉकिंग की तुलना में ज्यादा कम होती है, इसके पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

यह समझना भी जरूरी है कि पेट फूलना और शरीर में फ्लूइड जमा होने से होने वाली सूजन अलग-अलग समस्याएं हैं। ब्लोटिंग के पीछे पाचन, खानपान और दूसरी वजहें हो सकती हैं। इसलिए हर तरह की ब्लोटिंग का समाधान सिर्फ वॉकिंग नहीं है।

क्या वजन घटाने में मदद करती है?

लिम्फैटिक वॉकिंग अपने आप शरीर की चर्बी कम करने का कोई खास तरीका नहीं है। हालांकि, नियमित वॉकिंग कैलोरी खर्च करने, शारीरिक सक्रियता बढ़ाने और वजन को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। वजन घटाने के लिए खानपान, कुल शारीरिक गतिविधि, नींद और नियमितता भी अहम हैं।

इसलिए इस ट्रेंड को तेजी से वजन घटाने या शरीर को ‘डिटॉक्स’ करने का तरीका मानना सही नहीं होगा।

लिम्फैटिक वॉकिंग करने का सही तरीका

  • पोश्चर सीधा रखें: सिर सामान्य स्थिति में, कंधे आराम से और पीठ सीधी रखें।
  • आराम से सांस लें: नाक से सांस अंदर लें और सहज तरीके से बाहर छोड़ें। सांस रोकने या जबरदस्ती बहुत गहरी सांस लेने की जरूरत नहीं है।
  • हाथों को स्विंग करें: चलते समय हाथों को स्वाभाविक रूप से आगे-पीछे चलने दें।
  • आरामदायक गति रखें: ऐसी रफ्तार से चलें जिसमें आप बिना ज्यादा परेशानी के बात कर सकें।
  • नियमितता बनाए रखें: शुरुआत 10–15 मिनट से कर सकते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार समय बढ़ा सकते हैं।

यदि चलते समय दर्द, चक्कर या असामान्य सांस फूलने की समस्या हो, तो रुक जाएं। लगातार या बिना स्पष्ट कारण होने वाली सूजन को केवल इस ट्रेंड से ठीक करने की कोशिश न करें; डॉक्टर से सलाह लें।

लिम्फैटिक वॉकिंग सामान्य वॉकिंग को बेहतर पोश्चर और सांस पर ध्यान देते हुए करने का तरीका है। इसके लिए अलग से किसी चमत्कारी लाभ का प्रमाण नहीं है, लेकिन नियमित चलना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आदत है।

Share This Article